बुधवार, 27 मई 2009

बाल उपन्यास - ओस का अद्भुत जादूगर - फ्रैंक बौम - 3

(पिछले अंक में तुमने पढ़ा कि डोरोथी तूफान द्वारा उड़ाया जाकर मुंछकिनों के देश में आ गिरती है। उसके मकान के नीचे पूर्वी दिशा की कुटिल जादूगरनी आ जाती है और इस तरह उस जादूगरनी का अंत हो जाता है। अब आगे पढ़ो।)

2. मुंछकिनों से बातचीत - 2


"वह इतनी बूढ़ी थी कि उसका शरीर धूप में उड़ गया।" बूढ़ी औरत ने समझाया। "अब उसका अंत हो गया है। लेकिन उसके चांदी के जूते तुम्हारे हो गए हैं। तुम उन्हें पहन सकती हो।" वह आगे बढ़ी और नीचे झुककर चांदी के दोनों जूते उठा लिए और उन पर से मिट्टी झाड़कर उन्हें डोरोथी को दे दिया।

"उत्तर की जादूगरनी को अपने इन चांदी के जूतों पर बड़ा गर्व था" एक मुंछकिन ने कहा, "उनमें कोई जादुई शक्ति छिपी है, पर हम नहीं जानते कि वह क्या है।"

डोरोथी ने उन जूतों को घर के अंदर ले जाकर मेज पर रख दिया और फिर बाहर आकर मुंछकिनों से बोली, "मैं अपने चाचा-चाची के पास लौटना चाहती हूं क्योंकि मुझे पता है कि उन्हें मेरे बारे में चिंता हो रही होगी। वहां पहुंचने में तुम लोग मेरी मदद करोगे?"

मुंछकिन और जादूगरनी एक-दूसरे को देखने लगे और फिर डोरोथी को देखकर उन्होंने अफसोस से सिर हिलाया।

एक मुंछकिन ने कहा, "पूर्वी दिशा में एक विशाल रेगिस्तान है। कोई भी उसे पार नहीं कर सकता।"

दूसरे ने कहा, "दक्षिण में भी यही रेगिस्तान है, क्योंकि मैं वहां गया हूं। दक्षिण में क्वाडलिंगों का देश है।"

तीसरे ने कहा, "मैंने सुना है कि पश्चिम में भी यही रेगिस्तान है। उस देश में विंकी लोग रहते हैं, जिनपर पश्चिम की दुष्ट जादूगरनी राज करती है। यदि तुम उनके देश से गुजरोगी तो वह दुष्ट जादूगरनी तुम्हें अपना गुलाम बना लेगी।"

तब बूढ़ी जादूगरनी ने कहा, "और रही उत्तर की बात, वह मेरा ही इलाका है। उसके किनारे भी यही रेगिस्तान है, जो ओस के देश को घेरे हुए है। बेटी, मुझे अफसोस है कि तुम्हें अब हमारे ही बीच रहना होगा।"

यह सुनकर डोरोथी धीरे-धीरे सुबकने लगी क्योंकि उसे इन विचित्र लोगों के बीच बड़ा अकेलापन महसूस हो रहा था। उसके आंसुओं को देखकर शायद मुंछकिनों को भी बड़ी पीड़ा हुई, क्योंकि तुरंत ही उन्होंने भी अपने-अपने रूमाल निकाल लिए और वे भी जोर-जोर से सिसकने लगे। रही जादूगरनी की बात, तो उसने अपनी टोपी उतार ली और उसकी नोक को अपनी नाक के सिरे पर रखकर उसे ऊपर टिकाए रखते हुए गंभीर आवाज में बोली, "एक, दो, तीन!" तुरंत ही वह टोपी एक स्लेट में बदल गई। उसमें सफेद चोक से बड़े-बड़े अक्षरों में यह संदेश लिखा हुआ था, "डोरोथी पन्ना नगरी जाए।"

बूढ़ी औरत ने स्लेट को अपनी नाक से उतारकर उस पर लिखे संदेश को ध्यान से पढ़ा और फिर डोरोथी से पूछा,

"बेटी क्या तुम्हारा नाम डोरोथी है?"

"हां" डोरोथी ने अपने आंसू पोंछते हुए उत्तर दिया।

"तब तुम्हें पन्ना नगरी जाना होगा। शायद ओस तुम्हारी मदद करे।"

"यह नगरी कहां है?" डोरोथी ने पूछा।

"वह इस देश के ठीक मध्य में है। उस पर ओस का जादूगर राज करता है, वही ओस जिसका मैंने कुछ समय पहले जिक्र किया था।"

"क्या वह एक अच्छा आदमी है?" डोरोथी ने चिंता के साथ पूछा।

"वह एक अच्छा जादूगर है। आदमी है या नहीं, यह मैं नहीं कह सकती, क्योंकि मैंने उसे कभी नहीं देखा है।"

"मैं वहां तक कैसे पहुंच सकती हूं?" डोरोथी ने पूछा।

"तुम्हें चल कर ही जाना होगा। रास्ता लंबा है। उसके कुछ हिस्से बहुत ही सुहावने हैं, पर कुछ अंधियाले और डरावने भी हैं। पर तुम्हें संकट से बचाने के लिए मैं अपनी सारी जादुई शक्ति का प्रयोग करूंगी।"

"क्या तुम मेरे साथ नहीं चल सकतीं?" डोरोथी ने दयनीय स्वर में कहा। वह उसे अपना एकमात्र मित्र समझने लगी थी।

"नहीं मैं नहीं चल सकती," बुढ़िया ने कहा, "पर मैं तुम्हें अपना चुंबन दूंगी और उत्तर की जादूगरनी द्वारा चूमे गए व्यक्ति को नुक्सान पहुंचाने की हिम्मत कोई नहीं करेगा।"

यह कहकर वह डोरोथी के पास आई और उसके माथे को धीमे से चूम लिया। जहां उसके होंठ डोरोथी के माथे से लगे वहां एक चमकीला निशान बन गया, जैसा कि डोरोथी को बाद में पता चला।

"पन्ना नगरी की ओर जाने वाली सड़क पीली ईंटों से बनी है।" उस जादूगरनी ने कहा, "इसलिए तुम उसे आसानी से खोज सकोगी। जब तुम ओस देश में पहुंचो, वहां के जादूगर से बिलकुल नहीं डरना। उसे तुम्हारी समस्या बताओ, वह तुम्हारी मदद करेगा। अलविदा, मेरी बेटी।"

तीनों मुंछकिनों ने डोरोथी के सामने झुककर प्रणाम किया और उसकी यात्रा की सफलता की कामना करते हुए वे पेड़ों के बीच से लौट चले। जादूगरनी ने डोरोथी को देखकर प्यार से सिर हिलाया और अपनी बाईं ऐड़ी पर तीन बार घूमी जिससे वह तुरंत ही हवा में गायब हो गई। यह देखकर टोटो आश्चर्यचकित रह गया और काफी देर तक भौंकता रहा। बुढ़िया की मौजूदगी में वह उससे इतना सहम गया था कि जरा सी रिरियाहट निकालने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी।

पर चूंकि डोरोथी जानती थी कि वह एक जादूगरनी है, इसलिए उसने मन में यही सोचा था कि वह ठीक इसी प्रकार गायब होगी। अतः वह बिलकुल भी चकित नहीं हुई।

(... जारी)

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